यौवन में है बरसात

समझा रही हूँ बात
तुम अब भी नहीं समझे,
यौवन में है बरसात
तुम अब भी नहीं समझे।
चाहत भरी आंखों को तुम
अब भी नहीं समझे,
नहीं सो पाई पूरी रात
तुम अब भी नहीं समझे।
देखती हूँ तुम्हारे ख्वाब
तुम अब भी नहीं समझे,
चाहती हूं तुम्हारा साथ
तुम अब भी नहीं समझे।
भीगा हुआ है गात
तुम अब भी नहीं समझे
यौवन में है बरसात
तुम अब भी नहीं समझे।
——- डॉ0 सतीश पाण्डेय
चम्पावत

Comments

18 responses to “यौवन में है बरसात”

    1. धन्यवाद जी

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत ही उम्दा

    1. धन्यवाद जी

  2. Prayag Dharmani

    सुंदर रचना

    1. धन्यवाद जी

  3. Geeta kumari

    Nice lines

    1. धन्यवाद जी

  4. Kumar Piyush

    Bahut Khoob

    1. Satish Pandey

      Thanks

    1. Satish Pandey

      Thanks ji

  5. अति सुंदर

    1. Satish Pandey

      Thanks

  6. Piyush Joshi

    Very nice

    1. Satish Pandey

      Thanks

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