14 Comments

  1. गुज़ारिश , ज़हान
    बहुत ही सुंदर प्रस्तुति
    लोग अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए धार्मिक भेदभाव का सहारा लेते हैं, वही इन लोगों ने प्रकृति के रंगों, वेषभूषा आदि का भी बंटवारा करना शुरू कर दिया है ।कविता में इन सबसे ऊपर उठने की बात की गई है कुछ पंक्तियों में इंसानियत व मानवतावाद की झलकियां दिखाई देती है।

  2. कवि समाज में व्याप्त कुरीतियों के प्रति आवाज उठा रहा है जिस प्रकार वेशभूषा रंगो आदि का बटवारा धर्म के नाम पर किया जा रहा है बहुत ही गलत है कवि की या कविता समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य कर रही है और कभी के हृदय की वेदना को व्यक्त कर रही है भाव पक्ष तथा शिल्प बहुत ही मजबूत सुंदर और अच्छी दिशा में जा रहे हैं

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