इस रंग बिरंगी होली की हर बात बहुत ही निराली है,
जहाँ-जहाँ तक नज़रें जाती, मस्ती की हर तरफ तैयारी है,
माँ के हाँथ के पकवानों को चखने
किसी की घर जाने की तैयारी है,
बचपन को जीवंत कर देने किसी ने
पिचकारी फिर से थामी है,
इन सब बात के आनंद में खो जाने की अब बारी है
इस रंग बिरंगी होली की हर बात ही निराली है
फिर मुखौटे के पीछे छुपकर,
शरारत फिर से कर जाने की तैयारी है,
गुलाल कहकर कड़क रंग से
रंग देने की फिर से कुछ ने ठानी है,
होलिका संग अपने मन के मैलों को दहन कर
कोई नई शुरुआत के लिए उत्साहित है,
दुश्मनी को भूलकर
फिर से अबीर के तिलक लगाने की बारी है
आरंभ करो ख़ुशियों के इस त्यौहार का
हर बात इसकी बहुत निराली है
-मनीष
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