10 Comments

  1. कवि की सबसे बड़ी पूंजी सराहना ही है एक अच्छी सराहना से मन प्रफुल्लित हो उठता है

  2. सही बात है अनु जी….समीक्षा बिन कविता फीकी लगती है जैसे कि बिन श्रृंगार के दुल्हन…

      1. आप सब बहुत सुन्दर समीक्षा करते हो धीरे धीरे मै भी अच्छा लिखना और समीक्षा करना आप सब से सीख लूँगी।

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