राजकारीगर

वाह वाह मेरे विश्वकर्मा जी
शिल्पकला का सबको
कुछ न कुछ तो ज्ञान दिया।
किसी को बढ़ई बनया
तो किसी को
कुम्भकार का मान दिया।।
लोहार सोनार मिस्त्री का रूप
राजकारीगर का शान दिया।
पर राज कहाने के ख़ातिर
‘विनयचंद ‘ ये काम किया।।
जोड़ के टेढ़े -मेढे घर
खुद को क्यों बदनाम किया।
काम करो तू वही ‘विनयचंद ‘
जिसमें न हो छिया-छिया।।

Comments

7 responses to “राजकारीगर”

  1. वाह शास्त्री जी

  2. उत्तम विषय, सुंदर अभिव्यक्ति

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

      1. Pragya Shukla

        वेलकम

  3. बहुत सुंदर प्रस्तुतीकरण

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