रात-दिन रहते थे हम एक-दूजे के साये में
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एक-दूजे के तन से हम बदन को ढका करते थे।
रात-दिन
Comments
6 responses to “रात-दिन”
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एक दूजे के तन से हम बदन को ढका करते थे, बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति
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खूब
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वाह वाह
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Wah kaya baat hai.
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वाह
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बहुत ख़ूब
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