रात भर दर्द था कल

रात भर दर्द था कल
मन के किसी कोने में,
आज भी गम कहाँ कम
डर रहे हैं सोने में।
आज दिल में
ज़रा सी राहत है ,
जब सुना आपके मन में
हमारी चाहत है।

Comments

20 responses to “रात भर दर्द था कल”

  1. Suman Kumari

    सुन्दर

    1. बहुत सुंदर सादर धन्यवाद कविता के लिए

    2. बहुत बहुत आभार

    1. सादर नमस्कार

    1. सादर आभार जी

  2. सादर धयवाद

    1. सादर धन्यवाद जी

  3. रोज सुन्दर कविता सुनाते हैं आप

      1. आपको भी सादर धन्यवाद जी

  4. Geeta kumari

    सुंदर भाव

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद जी

  5. बहुत खूब

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  6. Ramesh Joshi

    Bahut khoob

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद

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