रात भर दर्द था कल
मन के किसी कोने में,
आज भी गम कहाँ कम
डर रहे हैं सोने में।
आज दिल में
ज़रा सी राहत है ,
जब सुना आपके मन में
हमारी चाहत है।
रात भर दर्द था कल
Comments
20 responses to “रात भर दर्द था कल”
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सुन्दर
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बहुत सुंदर सादर धन्यवाद कविता के लिए
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बहुत बहुत आभार
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वाह वाह
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सादर नमस्कार
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Nice
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सादर आभार जी
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सादर धयवाद
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सादर धन्यवाद जी
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रोज सुन्दर कविता सुनाते हैं आप
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धन्यवाद
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आपको भी सादर धन्यवाद जी
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सुंदर भाव
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सादर धन्यवाद
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सुन्दर
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सादर धन्यवाद जी
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बहुत खूब
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सादर धन्यवाद
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Bahut khoob
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धन्यवाद
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