रात है लेकिन न घबरा

रात है लेकिन न घबरा,
कल सुबह निश्चित उगेगी,
कर्म के बीजों को बो ले,
मंजिल तुझे निश्चित मिलेगी ।
भाग्य पर तू छोड़ मत दे,
प्रारब्ध पर निर्भर न रह,
हारने के भाव मत ला
जीत लूँगा रोज कह।
अंतस में तेरे शक्ति है
तू शक्ति का उपयोग कर,
कर्म से मत डिग कभी भी
जोश खुद में खूब भर।
स्वेद से जो प्यास अपनी
दे बुझा, ऐसा तू बन,
खूब चौके खूब छक्के
तू बना दे सैकड़ों रन।

Comments

10 responses to “रात है लेकिन न घबरा”

  1. Geeta kumari

    परिश्रम की राह पर चलने को प्रेरित करती हुई बहुत सुन्दर रचना।

    1. बहुत बहुत धन्यवाद।

  2. बहुत ही सुंदर रचना

    1. बहुत धन्यवाद

  3. कर्म करने की प्रेरणा देती हुई बहुत सुंदर कविता

    1. सादर धन्यवाद

  4. Very inspirational poem

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  5. Pragya Shukla

    प्रेरणादायक संदेश देती रचना

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