राम कहानी

राम कहानी सुनकर मेरा तन मन गदगद हुआ,
राम का नाम जपते जपते मेरा आत्मा निर्मल हुआ।
राम का कृपा पाकर मैं विभोर हुआ
राम नाम कि औषधि पाकर मैं धन्य हुआ।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

New Report

Close