5 Comments

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    झूठ कितना भी तांडव कर ले
    सच के आगे उसे झूकना पड़ेगा ।
    क्रोध कब-तक आग बनके जलेगा
    आखिर राख बनके उसे सोचना पड़ेगा ।।
    कवि विकास कुमार

  2. बहरूपियो के हर रूप से तो हम परिचित रहते हैं
    पर ना जाने क्यों सच्चाई कहने की बारे में हम कुछ भी ना कहते हैं

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