सडकें ठहर गई सी लगती हैं
हर तरफ सन्नाटा ही सन्नाटा है
बचकर निकलना अब चमन में
फूलों के संग मिल गया कांटा है।
कोरोना का कहर कहें या कहें
प्रकृति से खिलवाड़ की सजा
जो कल तक बस मस्त मलंग रहे
आज कर रहे इंकार लेने से मजा।
कोरोना काल में जीने का तरीका
हर किसी को हर हाल में बदलना होगा
थक कर रुक जाना विकल्प नहीं
उठकर सम्हलना और फिर चलना होगा।
वीरेंद्र
रूक जाना विकल्प नहीं
Comments
5 responses to “रूक जाना विकल्प नहीं”
-
Wah wah
-
सड़कें
-

👌
-
सही बात
-
सड़कों का मानवीकरण किया गया है
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.