रेशम के धागे…

सिर्फ धागों की नहीं है अहमियत यहाँ
रिश्तो में प्यार की मिठास
भी घुलती रहनी चाहिए।
सिर्फ तू प्यार जताए तो कैसे चलेगा
अक्सर नोक-झोंक भी होनी चाहिए।
रेशम के धागे तेरी कलाई सजाते हैं
तेरी आँखों में चमक भी होनी चाहिए।
हाँथों से तुझको खिलाती हूँ मिठाई
तेरे-मेरे रिश्ते में भी मिठास होनी चाहिए।
मैं हूँ इतनी जिद्दी सताती हूँ तुझको
मेरे जाने पर तेरी आँख दुखनी भी चाहिए।
जब मैं बन जाऊँ परदेसी तो भाई
तुझे मेरी कमी खलनी भी चाहिए।
तू प्यारा है मुझको साँसों से ज्यादा
तेरी धड़कन मेरे दम से धड़कनी भी चाहिए।

Comments

13 responses to “रेशम के धागे…”

  1. बहुत ही सुन्दर

  2. Geeta kumari

    वाह, प्रज्ञा बहन बहुत ही सुंदर👌👏

      1. Geeta kumari

        Welcome dear

  3. Neelam Tyagi Avatar

    बहुत सुंदर

    1. Pragya Shukla

      धन्यवाद दीदी

  4. राखी की उत्तम रचना

    1. Pragya Shukla

      धन्यवाद

  5. vivek singhal

    This comment is currently unavailable

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