रौनक बढ़ा देते हो

प्याज तुम
आँसू निकाल देते हो
फिर भी भाते हो
क्योंकि
स्वाद बढ़ा देते हो।
प्रेम तुम खुशियां
भी देते हो,
आँसू भी देते हो,
लेकिन जिन्दगी की
रौनक बढ़ा देते हो।
प्याज की कई
परतों की तरह,
जज्बात छिपाए रखते हो
भीतरी परत तक का
साथ निभा देते हो।

Comments

7 responses to “रौनक बढ़ा देते हो”

  1. बहुत सुंदर रचना

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

    1. सादर धन्यवाद

  2. Praduman Amit

    यही तो करिश्मा कुदरत का है। अति उत्तम चित्रण है।

    1. Satish Chandra Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  3. Geeta kumari

    प्याज की कई
    परतों की तरह,
    जज्बात छिपाए रखते हो
    भीतरी परत तक का
    साथ निभा देते हो।…
    …… प्याज के माध्यम से कवि ने मानव हृदय की भावनाओं को व्यक्त किया है.. साधारण से प्याज के उदाहरण से कवि सतीश जी ने बहुत ही असाधारण और सच्ची बात कह दी है, यही तो कवि की विशेषता है… लाजवाब लेखन

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