राहें

जब राहें कंटकित व वीरान हो,
और कोई ना तेरे साथ हो,

तब तुम व्यथित होना नहीं,
हिम्मत मन की खोना नहीं,

जब होता कोई पास नहीं,
तब होता हैं वो आसपास कहीं,

एहसास करो अपनी श्वासों में,
छू लो उसको अपने ख़्यालों में,

जब जग के नाथ होंगे साथ तेरे,
तब उसके हाथ होंगे सर पर तेरे

फिर सूनी राहें ना डरायेंगी,
पथ से भ्रमित ना कर पाऐंगी।
-अनु सिंगला

सुधार के लिए सुझाव का स्वागत है।

Comments

11 responses to “राहें”

  1. अति उत्तम रचना

    1. Anu Singla

      बहुत बहुत धन्यवाद

  2. बहुत खूब

    1. Anu Singla

      बहुत बहुत आभार

    1. Anu Singla

      सह्रदय आभार

  3. Praduman Amit

    बहुत ही सुन्दर भाव है।

    1. बहुत आभार 

  4. जब राहें कंटकित व वीरान हो,
    और कोई ना तेरे… 
    तब तुम व्यथित होना नहीं,
    हिम्मत मन की खोना नहीं,
    ……….कठिनाइयों में भी उत्साह वर्धन कराती हुई कवि अनु जी की बेहतरीन रचना

    1. Anu Singla

      बहुत बहुत धन्यावाद गीता जी

  5. सुंदर कला पक्ष

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