14 Comments

  1. बहुत ही प्रेरणादायक, अगर हम शब्दों को सोच समझकर वार्तालाप करें तो कभी भी हंसी या ईर्ष्या के पात्र नहीं बन सकते
    बहुत ही बेहतरीन रचना

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