लाॅकडाउन ने खाया सब

यूँ हीं बैशाखी चली गई
बिन भंगरा बिन गिद्दा के।
फीके सारे पर्व पर गए
बिना खीर -मलिद्दा के।।
लाॅकडाउन ने खाया सब
हम क्या खाऊँ मुँह को बांध।
धूंधली रह गई रात पूनम की
करवा में क्या करेगा चांद।।
दिन में तारे देखे सौहर
बीबी को है चाँद का इन्तजार।
कपड़े गहने मेंहदी मेकअप
बिन कैसा करवा का त्यौहार।।
फीके रह गए करवा जो तो
धनतेरस भी फीका होगा।
दिवाली की खुशहाली बिन
कैसा ‘ विनयचंद ‘टीका होगा।।

Comments

7 responses to “लाॅकडाउन ने खाया सब”

  1. Geeta kumari

    वाह, भाई जी बहुत सुंदर कविता है, एकदम समसामयिक यथार्थ चित्रण

  2. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    शुक्रिया बहिन

  3. बहुत सुंदर ।
    यथार्थ चित्रण

    1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

      धन्यवाद

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत ही उम्दा
    यथार्थपरक भाव

    1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

      धन्यवाद धन्यवाद

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