किसी भी हाल में तुझसे
नहीं पीछे रहूंगी मैं,
तू लिखना रात भर कविता,
सुबह जग कर पढूंगी मैं।
तेरी हर एक कविता पर
हंसूगी और और रोऊँगी,
लिखेगा जो भी बातें तू
मनन करती रहूँगी मैं।
लिखना रात भर कविता
Comments
13 responses to “लिखना रात भर कविता”
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Bahut hi sundar
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धन्यवाद
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नवीन
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Dhanyawad
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nice
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धन्यवाद जी
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तू लिखना रात भर कविता,
सुबह जग कर पढूंगी मैं। Wah!-
Thank you
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Nice
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सादर धन्यवाद
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क्या लिखूँ आपकी ए – तारीफ मेँ , मेरे चाचा जी
अल्फाज खत्म हो गये हैँ, तुम्हारी कविता पढ़ पढ़ के
बहुत सुन्दर 💐💐💐💐-
Thank you
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हँसूगी और और
कलापक्ष मजबूत नहीं है
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