लिखना रात भर कविता

किसी भी हाल में तुझसे
नहीं पीछे रहूंगी मैं,
तू लिखना रात भर कविता,
सुबह जग कर पढूंगी मैं।
तेरी हर एक कविता पर
हंसूगी और और रोऊँगी,
लिखेगा जो भी बातें तू
मनन करती रहूँगी मैं।

Comments

13 responses to “लिखना रात भर कविता”

  1. Indra Pandey

    Bahut hi sundar

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद

  2. MS Lohaghat

    नवीन

    1. Satish Pandey

      Dhanyawad

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद जी

  3. Anika Chaudhari Avatar

    तू लिखना रात भर कविता,
    सुबह जग कर पढूंगी मैं। Wah!

    1. Satish Pandey

      Thank you

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  4. Suraj Tiwari

    क्या लिखूँ आपकी ए – तारीफ मेँ , मेरे चाचा जी
    अल्फाज खत्म हो गये हैँ, तुम्हारी कविता पढ़ पढ़ के
    बहुत सुन्दर 💐💐💐💐

    1. Satish Pandey

      Thank you

  5. हँसूगी और और
    कलापक्ष मजबूत नहीं है

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