8 Comments

  1. दिसम्बर से इन्तजार था आपका पर आप तो गायब ही हो गईं थी..
    आपका स्वागत है इस मंच पर जो आप बिन बेजान पड़ा था…

  2. है सावन हमारा और गीता हमारी…
    हो गुलजार उपवन, है होली का मौसम,
    लेकर गुलाल रंगने लो हम आ गये…..
    ______होली आने से पहले होली की बधाई प्रज्ञा,स्वागत … बहुत सुंदर रचना

  3. बहुत ही सुंदर भाव आप तो कविता के माध्यम से जी उठती हैं प्रज्ञा जी अति उत्तम रचना

Leave a Reply