“लेखनी की ताकत”
होगी बेशुमार दौलत
आपके पास
पर हमारे पास गजब का हुनर है
देर से ही सही पर इंसान
समझ जाते हैं
किसी दूसरे पर आश्रित ना होकर
खुद कमाते हैं और खुद खाते हैं
जिस कुर्सी पर आज तुम
जमकर बैठे हो साहब !
उस कुर्सी को हमने ठुकराया है
बिना रिश्वत की है हमारी रोजी- रोटी
रिश्वत की रोटी को हमने ठुकराया है
अपनी आवाज की दम पर हम
लाखों दिलों में घर करते हैं
लेखनी की ताकत” से
रोज कितनों की तकदीर लिखते हैं
अपने मोहब्बत की सलामती
हम अपनी दम पर रखते हैं…
यह तो १००% सत्य है हुनरमंद हैं आप और
प्रतिभा की धनी हैं
साहित्य लेखन की
असीम प्रतिभा है आपमें
सुंदर वा समसामयिक रचना
Thank you so much
कलम को तलवार से कम ना समझो
बहुत खूब
धन्यवाद
बहुत खूब
बहुत-बहुत धन्यवाद
होगी बेशुमार दौलत
आपके पास
पर हमारे पास गजब का हुनर है
देर से ही सही पर इंसान
समझ जाते हैं
Jay ram jee ki
सुंदर समीक्षा है तो आपका बहुत-बहुत धन्यवाद
यह तो सत्य है Jahan Na pahunche Ravi vahan per pahunche Kavi