होगी बेशुमार दौलत
आपके पास
पर हमारे पास गजब का हुनर है
देर से ही सही पर इंसान
समझ जाते हैं
किसी दूसरे पर आश्रित ना होकर
खुद कमाते हैं और खुद खाते हैं
जिस कुर्सी पर आज तुम
जमकर बैठे हो साहब !
उस कुर्सी को हमने ठुकराया है
बिना रिश्वत की है हमारी रोजी- रोटी
रिश्वत की रोटी को हमने ठुकराया है
अपनी आवाज की दम पर हम
लाखों दिलों में घर करते हैं
लेखनी की ताकत” से
रोज कितनों की तकदीर लिखते हैं
अपने मोहब्बत की सलामती
हम अपनी दम पर रखते हैं…
“लेखनी की ताकत”
Comments
9 responses to ““लेखनी की ताकत””
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Thank you so much
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कलम को तलवार से कम ना समझो
बहुत खूब-

धन्यवाद
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बहुत खूब
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बहुत-बहुत धन्यवाद
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होगी बेशुमार दौलत
आपके पास
पर हमारे पास गजब का हुनर है
देर से ही सही पर इंसान
समझ जाते हैं
Jay ram jee ki-

सुंदर समीक्षा है तो आपका बहुत-बहुत धन्यवाद
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यह तो सत्य है Jahan Na pahunche Ravi vahan per pahunche Kavi
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