आज न सुन रही थी
न हीं पढ़ रही थी
वो केवल लेटी थी।
मेरी कविताओं को
पढ़कर खुश होनेवाली
बहू नहीं वो बेटी थी।।
लेटी थी
Comments
8 responses to “लेटी थी”
-

Wah Pandit jee kaya bat hai.
-
ये तो मेरे दिल की जज़्बात है।
-
-

वाह शास्त्री जी
-
बहुत खूब वाह
-
क्या हुआ था … कुछ मार्मिक सा लगा मुझे
-

This comment is currently unavailable
-

मार्मिक भाव
मार्मिक भाव -

👌🙏
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.