लौट आ घर

दूर चले गये राही
आ अब लौट आ,
कब तक रहेगा
रूठा-रूठा
तेरे बिना मैं भी तो
रहता हूँ टूटा-टूटा।
अपने दो बोल सुना जा
अब तो आ जा।
जिद न कर,
लौट आ घर।
तेरे बिना ये फिजायें
सूनी ही नहीं शून्य हैं,
जीते जी, जी रहा है मर
जिद न कर
लौट आ घर।
जीवंत कर दे महफ़िल को
अहसास दिला दे मुझ बुझदिल को,
कि प्रेम के अभाव में
नीरस है जीवन सफर
जिद न कर
लौट आ घर।

Comments

10 responses to “लौट आ घर”

  1. बहुत खूब

  2. BPMIC Goshainganj ayodhya

    बहुत अच्छा हैं

    1. धन्यवाद जी

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  3. Geeta kumari

    बहुत ख़ूब

    1. सादर धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

Leave a Reply

New Report

Close