लड़के!!

लड़के!!
20 नम्बर की चाबी ले आ,
जा उस गाड़ी के नट खोल,
टायर में हवा भर,
जा मोबिल ऑयल ले आ,
उस गाड़ी में ग्रीस कर ले।
औजार निकाल,
औजार संभाल,
जा ग्राहकों को पानी पिला,
दौड़ के जा
अंदर से ट्यूब ले आ।
यह सब दिन भर कहते रहे
काश यह भी कह लेते
ले खाना खा ले।
थोड़ा सुस्ता ले।

Comments

3 responses to “लड़के!!”

  1. Pragya Shukla

    बहुत गम्भीर वा मार्मिक रचना…

  2. Geeta kumari

    एक गरीब बच्चे के मनोभावों को व्यक्त करती हुई कवि सतीश जी की बहुत संजीदा रचना

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