6 Comments

  1. प्रतीक्षा वह अग्नि है जो भस्म कर
    देती है स्वप्नों और उम्मीदों के
    साथ-साथ मनुष्य की
    आत्मा को भी…!!
    _________ बहुत सुंदर और उच्च स्तरीय विचार प्रस्तुत किए हैं अनु जी आपने अपनी रचना में,बहुत ही गहरा सत्य छिपा है। रचना हृदय को छू गई , लाजवाब अभिव्यक्ति

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