वजह

कविता- वजह
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तन मे तुम हो, मन मे तुम हो
दिल में तुमको रखता हूं|
चाहे जितना मुझे भुलाओ,
निस दिन तुम पर मरता हूं|

जीने की वजह मेरी हो
मरने की वजह मेरी हो|
अब खुश मै बहुत हुआ ,
कविता लिखने की वजह मेरी हो|

प्यार मिले तो अच्छा है,
हंसी मिले तो अच्छा है|
यार मेरे सब गाली देते,
क्या उसमे ऐसा रखा है|

मैं भी हंसके कहता हूं,
बिन याद किये ना सोता हूँ|
रात गुजारा पर छत पर बैठे
कभी बैठ बैठ के सोया हू|

जब-जब यादों में वह आए,
पल भर की हंसी सताती है|
लिख दूं कितना शायरी कविता,
यह दिल से आवाज आती है|

अब ना मिले तो अच्छा है,
खुद से शिकायत करता हूं|
चाहे जितना नफरत कर लो,
सच दिल में तस्वीर तुम्हारी रखता हूं|

तस्वीर तुम्हारी काफी है|
बस मुस्कान तुम्हारी काफी है|
अब मैं तुमको पाऊ चाह नहीं,
दिल मे तस्वीर रहे काफी है|

हो सच मुच तुम कितनी सुन्दर,
जग को कल कौन बताये|
जब जग को छोड़ोगी तुम,
“ऋषि ” कि कविता ही तेरी महीमा गाये|
✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍
कवि -ऋषि कुमार “प्रभाकर ”
पता, ग्राम -पोस्ट खजुरी खुर्द, खजुरी
थाना- तह. कोरांव
जिला-प्रयागराज, पिन कोड 212306

Comments

9 responses to “वजह”

  1. आपकी कविता में कुछ अलग सा एहसास है
    पर पता नहीं क्या?

    1. अब तो लिखना हि बाकी है
      क्योंकि दिल मे उसकी झाकि है

      1. कविता लिखकर आप सही दिशा में जा रहे हैं।

  2. Geeta kumari

    वाह,बहुत सुंदर

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