दिल की गलियाँ…

आज बहुत दिनों बाद आई हूँ
तुम्हारे दिल की गलियों में..
सफर करने को
जरा संभाल कर रखना
अपनी धड़कनों को
मुझे देखकर कहीं मचल ना पड़ें…
यूं नजरों से देखने की कोशिश ना करो मुझे
आंखों को बंद करके बस महसूस करो मुझे..
तुम्हारी बंद पलकों में नजर आऊंगी
आंखें खोल कर देखना चाहोगे अगर
तो गुम हो जाऊंगी…
तभी तो आज बहुत दिनों बाद आई हूँ
तुम्हारे दिल की गलियों में सफर करने को…

Comments

16 responses to “दिल की गलियाँ…”

  1. Prayag Dharmani

    Feelingful thoughts

  2. Pragya Shukla

    thank you so much sir

  3. ह्रदय स्पर्शी रचना

    1. थैंक्स दीदी

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    भावपूर्ण, बेहतरीन प्रस्तुति

    1. थैंक्स भाई

  5. Rishi Kumar

    बहुत खूब कहा आपने 👌👌👌

    1. Pragya Shukla

      थैंक्स फॉर कमेंट्स

  6. Virendra sen Avatar
    Virendra sen

    आंखें खोल कर देखना चाहोगे तो गुम हो जाऊंगी । आपकी सोच ने तो निशब्द कर दिया सुन्दर पंक्तियां

    1. Pragya Shukla

      🙏🙏

  7. Virendra sen Avatar
    Virendra sen

    आंखें खोल कर देखोगे तो गुम हो जाऊंगी आपकी रचना ने निशब्द कर दिया। सुन्दर पंक्तियां

    1. Pragya Shukla

      🙏🙏धन्यवाद सर आपका

  8. vivek singhal

    This comment is currently unavailable

  9. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

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