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  1. पृथ्वी दिवस की सार्थकता को चरितार्थ करती हुई आपकी यह कविता,अति सुंदर रचना

  2. पृथ्वी मां की रक्षा को बढ़ाओ अपने हाथ,फिर कमी ना होगी कुछ जीवन में होगी तरक्की दिन-रात।
    आपकी कविता का संपूर्ण अंश बहुत सारगर्भित है एकता जी,
    बहुत सुंदर रचना

  3. हम सब मां को मनाएंगे और करेंगे फिर से वंदन,
    पृथ्वी को हरा-भरा करने को निछावर कर दें अपना तन मन,
    बहुत सुन्दर रचना है। 🙏🙏

    1. एक दिन के पृथ्वी दिवस से क्या होगा,आओ रोज पृथ्वी दिवस मनाएं हम।
      आओ फिर से वृक्ष लगाएं हम।बहुत सुंदर एकता जी,
      बहुत सुंदर रचना

  4. एक अकेले से कुछ ना होगा हमें चाहिए सबका साथ
    पृथ्वी मां की रक्षा को फिर बढ़ाओ सब अपने हाथ,
    पृथ्वी दिवस की सार्थकता को चरितार्थ करते हुए आपकी यह कविता बेहद सुंदर रचना

  5. बहुत ही सुन्दर रचना
    ऑक्सीजन की कमी यूं बनी हुई,सांसे यूं सबकी थमी हुई,
    लोगों का बिछड़ना शुरू हुआ,आंखों में फिर से नमी हुई,
    ऑक्सीजन की कमी को दूर करें यूं हम,
    आओ फिर से वृक्ष लगाएं हम।
    👌👌🙏🙏🌹

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