वास्तविक गणतंत्र

गणों को नाज़ है कि वो तंत्र का हिस्सा हैं
क्या पता उन्हें कि वो षड़यंत्र का हिस्सा हैं
ये जो श्वेत वस्त्र धारी हैं
कहलाते लोकतंत्र के पुजारी हैं
असल में चुनावी वक्त के अवतारी हैं
शाम दाम दण्ड भेद की नीति अपनाते हैं
प्रतिक्षण मर्यादा भूल जाते हैं
देश के नाम पर जान न्योछावर की बात करते हैं
रोज़ संसद में संस्कृति सीमा पार करते हैं
कहने को सफेदपोश कहलाते हैं
हकीक़त है कि अपने कर्मों को छिपाते हैं
गण अधिकारों को खो रहे हैं
कर्तव्यों को ढो रहे हैं
निज निष्ठा विखंडित
देश भी तो खंडित है , फ़िर भी
गणों को नाज़ है कि वो तंत्र का हिस्सा हैं
क्या पता उन्हें कि वो षड़यंत्र का हिस्सा हैं

Comments

10 responses to “वास्तविक गणतंत्र”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    Satik

  2. Priya Choudhary

    right

    1. Kanchan Dwivedi

      Thanks

    1. Kanchan Dwivedi

      Thanks

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