वाह! क्या नज़्म है|

थोडी सी उदासी जमा कर ली है

मुठ्टी भर दर्द को कैद कर रखा है

दिल के इक कौने में

 

कभी कभी इसी दर्द को घोलकर स्याही में

बिखेर देता हूं उदास कागज़ पर

कुछ अल्फ़ाज़ से खिंच जाते है

लोग कहते है

वाह! क्या नज़्म है|

Comments

7 responses to “वाह! क्या नज़्म है|”

    1. Panna Avatar
      Panna

      thanks kapil

  1. Pankaj Soni Avatar
    Pankaj Soni

    Waah kyaaa njmm hhh

    1. Panna Avatar
      Panna

      thanks pankaj

  2. राम नरेशपुरवाला

    वाह

  3. राम नरेशपुरवाला

    सुन्दर

  4. Satish Pandey

    कभी कभी इसी दर्द को घोलकर स्याही में

    बिखेर देता हूं उदास कागज़ पर
    वाह क्या बात है।

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