विकास के भरोसे कब तक रोटी सेंकोगें
मैली मैली गंगा मईया कब तक तुम बोलोगे
राजनीति के पहिए का वीरों तुम इलाज करो
गंगा के अभियान को जन जन तक प्रसार करो
धनुष बाण टांगें कब तक कंधा तुम ढुढ़ोगे
राम के शस्त्र का मर्यादा कब तक भूलोंगे
अपनी गलती कब तक एक दुसरो पर ठेलोग
लक्ष्य साधकर गंगा का कब तक तुम जियोगे
कमर कसो इतिहास रचो गंगा को साफ करो
घर घर अलख जगाकर अब तो इंसाफ करो
अपने अंदर का रावन दहन कर हार को स्विकार करो
थैली कुड़ा करकट को गंगा से अभिमुक्त करो
उठो प्यारे जी जान लगाकर मईया तुमको पुकार रही
खून के एक एक बूंद का हिसाब मईया तुमसे मांग रही
मैली मैली कलंक का मईया उध्दार चाह रही
स्वच्छ सुंदर अविरल धारा मईया अब मांग रही
गंगा मईया नहीं राजनीति की हिस्सा है
भारत के वीर सपूतों की गंगा मईया है
गंगा मईया नहीं है मुद्दा राजतिलक कुर्सी की
गंगा मईया है भारत में धरा की पवित्र धरोहर है
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