वो आये दबे पांव से यूं
कानों ने तो कुछ सुना नहीं
मगर दिल ने सब सुन लिया
वो आये दबे पांव से यूं
Comments
14 responses to “वो आये दबे पांव से यूं”
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बहुत सुंदर रचना वसुंधरा जी
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धन्यवाद
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वाह क्या कहने, वसुंधरा जी, बहुत खूब
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धन्यवाद
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सुन्दर पंक्तियां
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धन्यवाद
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Wah
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धन्यवाद
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जिनके साथ गहरे आंतरिक सम्बंध होते हैं
उनका आभास मन में हो ही जाता है।
बहुत सुंदर पंक्तियां-

धन्यवाद
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इसे ही कहते है लोग सच्ची मुहब्बत।
खुदा करे लगे न कभी इन पर तोहमत।।-

धन्यवाद
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सुंदर
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धन्यवाद
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