हमने सच बोला, वो बुरा मान गए
ज़रा मुंह खोला, वो बुरा मान गए।
सदियों से सुनती ही तो आई है नारी,
आज ज़रा सुनाया, तो बुरा मान गए।
औरों की चाहत को हमेशा चाहा,
आज अपनी चाहत ज़ाहिर की,वो बुरा मान गए।
ऐसा नहीं है कि हम समझते नहीं थे,
उन्हें लगा, हम समझने लगे, तो बुरा मान गए।
वो बुरा मान गए..
Comments
13 responses to “वो बुरा मान गए..”
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great ..
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Thank you….
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बेहतरी
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बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
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वाह-वाह
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बहुत बहुत धन्यवाद आपका 🙏
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Welcome di
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बहुत खूब
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बहुत बहुत शुक्रिया 🙏
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Nice
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Thank you Kamla ji 🙏
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अतीव सुन्दर
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Thanks for your nice complement Piyush ji 🙏
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