शागिर्द ए शाम

जब शागिर्द ए शाम तुम हो तो खल्क का ख्याल क्या करें
जुस्तजु ही नहीं किसी जबाब की तो सवाल क्या करें

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Comments

4 responses to “शागिर्द ए शाम”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Wah

  2. Satish Pandey

    वाह वाह, अतिसुन्दर पंक्तियाँ

  3. Satish Pandey

    लाजबाब

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