सितमगारों की बस्ती में सही
मेरा भी नाम हो जाए
मेरी नींदें छीन कर
चैन से सोने वाली
आज के बाद
तेरी नींद भी हराम हो जाए
किया था वादा हमसे
तुम्हें याद ना करेंगे
तुम्हें याद भी ना आएंगे
लगता है वह अब
अपनी बात से मुकर गए हैं
सच तो यह है वह फिर से
मेरी खातिर सवर गए हैं
अब होता है जो, वह प्यार में
अंजाम हो जाए
मेरी नींदें छीन कर
चैन से सोने वाली
आज की रात
तेरी नींद भी हराम हो जाए ।
शायरी
Comments
7 responses to “शायरी”
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Nice
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👍👌
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बहुत बढ़िया
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nice
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अच्छा लिखा है
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बहुत सुंदर प्रतिकार
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क्या बात है सितम गैरों की बस्ती में नई अभिव्यक्ति
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