10 Comments

  1. जज्बात बयां करने के लिए
    मुलाकात होना जरूरी नहीं है,
    जब दिल से दिल का मिलन है तो कैसी दूरी है???
    भाव की प्रधानता एवं शिल्प भी सराहनीय है

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