कवि नहीं शिल्पकार हूँ मैं !
एक ऐसा कवि,
जो कागज पर
अपनी भावनाओं भरी कलम से
शब्दरूपी
नक्काशी करता है..
जिसकी सुंदरता सिर्फ
नेत्रों से दिखाई ही नहीं पड़ती
बल्कि हृदय से महसूस भी होती है…
*शिल्पकार*
Comments
8 responses to “*शिल्पकार*”
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वाह लाजवाब अभिव्यक्ति , कविता और कवि की इस से सुंदर परिभाषा तो हो ही नहीं सकती ।आपकी लेखनी से निकला एक-एक शब्द सत्य की कसौटी पर खरा उतर रहा है । बहुत ख़ूब
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इतनी प्यारी समालोचना के लिए आभार
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वाह बहुत ही लाजवाब
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धन्यवाद
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Very beautiful
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Thanks dear
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Very good
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अतिसुंदर
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