तुम्हारे अंदर जो मैं है,
वह तुम्हें पीछे धकेलता है।
तुम्हारे अंदर जो पीड़ा है,
वह तुम्हें दया सिखाती है।
तुम्हारे अंदर जो प्यार है,
वह तुम्हें भावुक बनाता है।
तुम्हारे अंदर जो एक जानवर है,
वह तुम्हें वहशत सिखाता है।
तुम्हारे अंदर जो गुस्सा है,
वह तुम्हें दुश्मनी निभाना सिखाता है।
तुम्हारे अंदर जो शर्म है,
वह तुम्हे सुंदर बनाता है।
तुम्हारे अंदर जो समर्पण है,
वह तुम्हें पूर्णता की ओर ले जाता है।
सभी अच्छे बुरे गुण समाए हैं तुम में,
तुम्हारा तुम्हारे प्रति गुणों का चयन ही
तुम्हें श्रेष्ठता या निकृष्टता की ओर ले जाता है।
निमिषा सिंघल
श्रेष्ठ और निकृष्ट गुण
Comments
15 responses to “श्रेष्ठ और निकृष्ट गुण”
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Great
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Dhanyavad mitra
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Great
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❤️❤️
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सुन्दर रचना
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धन्यवाद
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Good
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Thanks dear ❤️
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वाह
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Thank you
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Nice
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🌹🌹🌹🌹
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वाह बहुत सुंदर रचना
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Dhanyavad
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G8t
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