संसार परिवार

मानो अगर मानव संसार ही परिवार है
फिर क्यूँ उठा रहे बंदूक औ तलवार है
इंसानियत के नाते सहयोग सबका करना
कर्तव्य कर संसार में करना तुम्हें अधिकार है

Comments

4 responses to “संसार परिवार”

  1. Amita

    सुंदर पंक्तियां

  2. संसार  को परिवार मानकर चलने की तथा आपस में मित्रता बनाकर रहने की सीख देती पाठक जी की बहुत ही सुंदर रचना

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