सपनों की पंख

मत काटो मेरी पंख ;मेरे अपनों
मैं बुलंदी के आसमानों में उड़ना जानता हूं।
छोड़ दो मुझे मेरे रास्ते पर ,
मैं ठोकरो से संभलना जानता हूं।

Comments

11 responses to “सपनों की पंख”

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत-बहुत धन्यवाद सर 🙏 ऐसे ही हौसला बढ़ाते रहें 🙏😊

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत बहुत आभार 🙏

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      धन्यवाद 🙏 जी

  1. Geeta kumari

    Very nice

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत-बहुत आभार व धन्यवाद

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      Thank you 🙏

  2. मेरे पंख।
    कवि ने उत्तम
    उपमा का प्रयोग किया है

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