सफ़र

सफ़र
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बंदिशो के आँगन में बुलन्दियो के आसमान तक
यह सफ़र है, तेरी बेचैनी से,तेरी पहचान तक
कहाँ थमी है,तेरी चुनौतियों की कंटीली डगर
मंजिल तो पाना है ही,चाहे जितना लम्बा हो सफ़र
सौन्दर्य,मातृत्व व बुद्धि के बल,खुद को साबित करना है
तप,त्याग,महानता की ही नहीं,
सफलता की गौरवगाथा बनना है
खुद को साबित कर,जाना है आसमान तक—–

सुमन आर्या

Comments

6 responses to “सफ़र”

  1. Satish Pandey

    बहुत खूब

    1. Suman Kumari

      पैनी नज़र से देखने के लिए धन्यवाद ।
      भूलवश दो बार ।

      1. Abhishek kumar

        कोई बात नहीं सबसे हो जाता है

      2. Abhishek kumar

        भूल तो सबसे होती है ना उससे भी हो जाती है बस मैंने सूचित कर दिया

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