सरोगेट मदर( उधार का मातृत्व)
जन्म तो दूंगी तुम्हें सहेजकर
लेकिन मजबूर हूं
देख नहीं पाऊंगी तुम्हें बेचकर।
विप्पनतावश हारी हूं
परिस्थितियों के आगे बेचारी हूं।
मैं अपनी कोख का
सौदा करने के लिए मजबूर
एक दुखियारी हूं।
आत्मग्लानि
मेरी आत्मा को
कचोटती रहेगी जीवन पर्यंत।
झेलूंगी इस दंश को मरने तलक।
कुछ मजबूर दंपतियों के लिए
मेरा ऐसा करना
परोपकार भी है
लेकिन परोपकार के लिए
अंगारों पर जलना
अब मेरी नियति है।
कोख बेचने के जुर्म में
कभी-कभी
मुझे त्याग भी दिया जाएगा।
तिरस्कृत और प्रताड़ित किया जाएगा।
पर पेट की खातिर
मै यह सब सह लूंगी चुपचाप।
कुछ आधुनिक महिलाओं की
तराशी हुई देह
खराब ना हो जाए
उनके लिए भी
इस्तेमाल किया जाएगा मुझे।
जन्म देकर भी
ममता नहीं लुटा पाऊंगी मै।
क्योंकि बेच दिया है मैंने पैसे लेकर
खरीद लिया है किसी ने पैसे देकर
एक अभागिन मां से तुम्हे।
निमिषा सिंघल
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