सर्दी की धूप

सर्दी की धूप बड़ी सुहानी
सेवन कर प्राणी सुखदाई ।
चेतन जीव की क्या कहिये
सुख जड़ जात भी पाई।।
ठण्ड हरे नित जीव जगत के
अमराई नित भोजन पावै।
विनयचंद विटामिन डी से
अश्थि सबल बन जाते।।

Comments

10 responses to “सर्दी की धूप”

  1. Geeta kumari

    “विनयचंद विटामिन डी सेअश्थि सबल बन जाते।।”
    विटामिन डी के बारे में बताती हुई कवि विनायचंद शास्त्री जी की बहुत ही सुन्दर रचना । सर्दियों की धूप पर बहुत अच्छी कविता, भाई जी

  2. बहुत ही सुन्दर

  3. Virendra sen Avatar

    अति सुंदर

  4. लाजवाब अभिव्यक्ति

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  5. अच्छा एवं सफल लेखन

    1. शुक्रिया तहे दिल से

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