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  1. यही है सीता और सावित्री की पावन कहानी।
    अमर इतिहास और लोगों की निर्मल जुबानी।।
    मुड़ के देखा जो सती ने एक बार।
    सिवा एक माँ के कोई किया न सत्कार।।
    बहनों की मुस्कुराहट और पिता का व्यवहार।
    पीड़ हृदय की सह न पाई और छोड़ गई संसार।।
    बेहतरीन भाव और अतिसुंदर रचना।।

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