साजिशें

साजिशें भी थीं, सामने गुनहगार भी थे।
जवाब हमारे पास, तैयार भी थे।
हम चुप रह कर सब सहते रहे,
थोड़े नादान ही सही हम,मगर
थोड़े समझदार भी थे।

Comments

21 responses to “साजिशें”

  1. अत्यंत सरल शब्दों में सच्ची बात सामने लाती हुई पंक्तियाँ, आपकी एक एक कविता स्तरीय है। वाह वाह

    1. आप के मूल्यांकन पर खरा उतरना मेरे लिए गर्व की बात है, क्योंकि उच्च कोटि के कवि की प्रशंसा हर एक के नसीब में नहीं होती है। उत्साह – वर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार 🙏

      1. सादर स्वागत

    1. Geeta kumari

      Thank you ☺️🙏

  2. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Geeta kumari

      Thank you very much Isha ji💐

  3. बहुत बढ़िया

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत शुक्रिया जी 🙏

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका भाई जी 🙏

    1. Geeta kumari

      Thanks for your pricious complement.it is really great.

  4. MS Lohaghat

    वाह वाह

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏

  5. Piyush Joshi

    बहुत ही उम्दा

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद पीयूष जी 🙏

  6. Chandra Pandey

    Nice poem ji

    1. Geeta kumari

      Very much Thank you ji 🙏

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