5 Comments

  1. साझी साइकिल ले लेते,
    खूब सवारी करते रहते
    हम भी खूब मजे लेते
    _________बच्चे मन के सच्चे, बच्चों की मासूमियत को दर्शाती हुई कवि सतीश जी की बहुत ही सुंदर रचना।कविता दिल को छू गई सर,वास्तव में बहुत ही उत्कृष्ठ रचना है यह आपकी।

  2. “दीदी अगर दस रुपये की भी
    साइकिल आती होती तो
    तुम भी लेती मैं भी लेती,
    इतनी सस्ती आती तो।
    अगर बीस की भी आती तो
    साझी साइकिल ले लेते,”
    बड़ी ही मार्मिक चित्रण किया है पाण्डेयजी आपने।

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