सावन की सभा

सावन की सभा सजी है,
शुक्रवार की शाम है ।
महफ़िल में मित्र मिले है ,
सबके सुंदर – सुंदर नाम हैं ।
मित्र बने अनजाने थे सब,
अब लगते हैं, पहचाने से..।

Comments

22 responses to “सावन की सभा”

  1. वाह, क्या बात है, बहुत बढ़िया पंक्तियाँ

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏

    1. Geeta kumari

      Thank you very much dear pragya

  2. Satish Pandey

    मित्र बने अनजाने थे सब,
    अब लगते हैं, पहचाने से..।
    वाह, बहुत ही सुंदर और आत्मीय अभिव्यक्ति। लेखनी का अभिवादन

    1. Geeta kumari

      आपकी प्रेरक और सुंदर समीक्षा के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया सतीश जी । ये मेरा बहुत उत्साह वर्धन करती हैं।🙏

  3. बहुत सुंदर पंक्तियां

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत शुक्रिया प्रतिमा जी

  4. वाह जी वाह,

    1. Geeta kumari

      शुक्रिया चंद्रा जी

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका भाई जी 🙏

  5. Piyush Joshi

    बहुत खूब

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद पीयूष जी

  6. Indu Pandey

    BAHUT KHOOB

    1. Geeta kumari

      शुक्रिया इंदु जी🙏

  7. Devi Kamla

    बहुत खूब, वाह

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत आभार मैम🙏

  8. Isha Pandey

    Atisundar

    1. Geeta kumari

      Thank you very much Isha ji

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