*सावन पर*

हुई है बारिश खूब झमाझम
ठंडा-ठंडा हो गया है मौसम
मेरे आंगन का एक पौधा
है अभी जो थोड़ा सा छोटा
पानी ना मिल पाया था
उस पौधे को कुछ दिनों से
आज बारिश की बूंदों में
भीग-भीग कर,
लहरा रहा है
लगता है कुछ गा रहा है
लगता है लिखी है उसने
आज एक नई कविता
मेरा नाम लेकर मुझे बुला रहा है
कह रहा है.. आजा “गीता”
मेरी भी प्रकाशित करवा दे
सावन पर एक कविता
_____✍️गीता

Comments

10 responses to “*सावन पर*”

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद पीयूष जी

  1. अतिसुंदर रचना

    1. Geeta kumari

      सराहना हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी🙏

    1. Geeta kumari

      Thanks Anu ji

  2. Satish Pandey

    “लगता है कुछ गा रहा है
    लगता है लिखी है उसने
    आज एक नई कविता
    मेरा नाम लेकर मुझे बुला रहा है”
    —— बहुत खूब, अति उत्तम कविता, बहुत सुन्दर पंक्तियाँ

    1. Geeta kumari

      सुंदर और प्रेरक समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी

  3. उच्चतम रचना

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