तुमसे नफरत हम नहीं करते
तुमसे ईर्ष्या भी नहीं करते
तुम्हारे कारण ही तो लिख पाते हैं
अंदर से प्रेरित हो पाते हैं
साहित्य साधना को बढ़ रहे हैं
तुम्हारे दिखाए रास्ते पर ही चल रहे हैं
पुरानी बातों को हमने कब का भुला दिया
तुम्हारे रास्ते को ही अपना लिया
साहित्य साधना
Comments
2 responses to “साहित्य साधना”
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बहुत खूब
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आपका बहुत-बहुत आभार
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