सिमट गया चंद लफ़्जों में आज
ढल गये अहसास कुछ अश्कों मे आज
कहने को तमाम जिंदगी का तजूर्बा है मेरे पास
सुनने वाला कोई भी नही है आज |
सिमट गया चंद लफ़्जों में आज

Comments
4 responses to “सिमट गया चंद लफ़्जों में आज”
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Nice
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thanks 🙂
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Nice one
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वाह जी वाह
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