सुना दे मन मीत एक कविता
जिससे हो झंकार हृदय में, और बहे सुख सरिता।
दूरी रख ले उलझन मुझसे, ऐसी कह दे कविता।
भर दे थोड़ा सा आकर्षण, मुझे बना दे ललिता।
बन जायें खुशियाँ साजन सी, मैं बन जाऊँ वनिता।
कानों में हो मधुर मधुर धुन, ऐसी सुना दे कविता।
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काव्यस्वरूप – पद रूप में।
सुना दे मन मीत एक कविता (पद छन्द)
Comments
2 responses to “सुना दे मन मीत एक कविता (पद छन्द)”
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बन जायें खुशियाँ साजन सी, मैं बन जाऊँ वनिता।
कानों में हो मधुर मधुर धुन, ऐसी सुना दे कविता
______ कवि सतीश जी की पद छंद शैली में रूमानियत भरी हुई बहुत ही मधुर रचना….लाजवाब अभिव्यक्ति -
बहुत सुंदर
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