ऐ पुरूष सुन!
स्त्री हूं पतंग नहीं कि जिसकी डोर सदैव तुम्हारे हाथ में रहेगी…….
स्त्री हूं पतंग नहीं
Comments
10 responses to “स्त्री हूं पतंग नहीं”
-
सटीक
-

Thank you
-
superv
-

Thanks
-
-
सही एवं सुन्दर।
-

धन्यवाद
-

Sunder👏👏
-
Good
-

Good
-

सही कहा
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.